➤ पेट्रोल-डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर ऑर्फन एंड विडो सेस लागू
➤ शिमला में पेट्रोल ₹103.08 और डीजल ₹95.27 प्रति लीटर हुआ
➤ पर्यटन, टैक्सी, बस और सेब ढुलाई की लागत बढ़ने की आशंका
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल के दाम बढ़ गए हैं। राज्य सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर ऑर्फन एंड विडो सेस लागू कर दिया है। मंगलवार देर शाम जारी अधिसूचना के बाद ईंधन की नई दरें मध्यरात्रि 12 बजे से प्रभावी हो गई हैं। इसके साथ ही प्रदेश में वाहन चलाना और हिमाचल की यात्रा करना थोड़ा महंगा हो गया है।
सेस लागू होने के बाद शिमला में पेट्रोल की कीमत 102.48 रुपये से बढ़कर 103.08 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल 94.67 रुपये से बढ़कर 95.27 रुपये प्रति लीटर हो गया है। ईंधन की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम वाहन चालकों के साथ-साथ पर्यटन, परिवहन और माल ढुलाई से जुड़े कारोबार पर भी असर डाल सकती है।
पहली बिक्री के समय लगाया जाएगा सेस
राज्य कर एवं आबकारी विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक ऑर्फन एंड विडो सेस राज्य में पेट्रोल और डीजल की पहली बिक्री के समय लगाया जाएगा। सरकार ने यह निर्णय हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2005 की धारा 6-ए के तहत लिया है।
इससे पेट्रोल और डीजल की खरीद पर उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में प्रति लीटर 60 पैसे अधिक चुकाने होंगे। हालांकि राशि छोटी दिखाई देती है, लेकिन बड़ी मात्रा में ईंधन की खपत वाले परिवहन और व्यावसायिक क्षेत्रों में इसका संचयी प्रभाव देखने को मिल सकता है।
पर्यटन उद्योग पर पड़ेगा सीधा असर
ईंधन की कीमत बढ़ने का असर हिमाचल के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ने की संभावना है। प्रदेश में हर वर्ष करीब 1.25 करोड़ से 1.75 करोड़ पर्यटक पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या में पर्यटक अपने निजी वाहनों, टैक्सियों और बसों के जरिए हिमाचल का रुख करते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में आने वाले पर्यटकों द्वारा निजी वाहन, टैक्सी और बसों के माध्यम से सालाना करीब 225 करोड़ रुपये का ईंधन खर्च किया जाता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बाद यात्रा की कुल लागत में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
पर्यटकों के लिए इसका असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहने की आशंका है। यदि टैक्सी और बस संचालकों की परिचालन लागत बढ़ती है तो आने वाले समय में टैक्सी और बस किराए में भी बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है। इसका असर शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, चंबा, कुल्लू और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा पर पड़ सकता है।
सेब सीजन में बढ़ेगी ढुलाई की लागत
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब हिमाचल में सेब सीजन पीक पर है। प्रदेश की करीब 5500 करोड़ रुपये की सेब आर्थिकी के लिए परिवहन बेहद महत्वपूर्ण है।
बागवानों के खेतों और बागों से सेब मंडियों तथा अन्य राज्यों तक पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में ट्रकों का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रकों के संचालन में डीजल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में डीजल की कीमत बढ़ने से सेब की ढुलाई लागत बढ़ने की संभावना है।
परिवहन खर्च बढ़ने का असर आगे चलकर बागवानों, आढ़तियों, कारोबारियों और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। खासकर लंबे रूट पर सेब की ढुलाई करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के लिए ईंधन लागत में लगातार होने वाले बदलाव महत्वपूर्ण होते हैं।
अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण पर खर्च होगा सेस
राज्य सरकार का कहना है कि इस सेस से जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में किया जाएगा।
सरकार ने जरूरतमंद वर्गों के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन जुटाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की है। यानी ईंधन पर लगाया गया यह अतिरिक्त शुल्क सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए राजस्व जुटाने का माध्यम बनेगा।
बजट सत्र में किया गया था प्रावधान
ऑर्फन एंड विडो सेस लगाने का प्रावधान इसी साल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान किए गए संशोधन में किया गया था। कांग्रेस सरकार ने हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर संशोधन अधिनियम 2026 पारित किया था।
इस संशोधन में जरूरतमंद वर्गों, विशेष रूप से विधवाओं और अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए अधिकतम पांच रुपये प्रति लीटर तक सेस लगाने का प्रावधान किया गया था। हालांकि तत्काल इसे पूरी सीमा तक लागू नहीं किया गया और अब सरकार ने 60 पैसे प्रति लीटर सेस लागू करने का फैसला लिया है।
चार महीने से टला हुआ था फैसला
सरकार की ओर से बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दबाव रहा। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव के दौरान केंद्र सरकार की ओर से ईंधन कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की गई थी।
इसी वजह से राज्य सरकार करीब चार महीने तक ईंधन पर प्रस्तावित सेस लागू नहीं कर पाई। अब सरकार ने इसे लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।
विभागीय अधिकारियों को भेजी गई अधिसूचना
राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने इस संबंध में जारी अधिसूचना की प्रतियां विभाग के आयुक्त के अलावा सभी अतिरिक्त आयुक्तों, संयुक्त आयुक्तों, उप आयुक्तों और सहायक आयुक्तों को भेज दी हैं।
अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिसूचना में व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गई है।
आम आदमी से लेकर कारोबार तक असर
पेट्रोल-डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी भले ही पहली नजर में मामूली दिखाई दे, लेकिन हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में परिवहन लागत का महत्व अधिक है। यहां पर्यटन, कृषि-बागवानी, माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन काफी हद तक सड़क परिवहन पर निर्भर हैं।
ऐसे में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन यात्रा, टैक्सी सेवाओं, बस संचालन, माल ढुलाई और सेब परिवहन की लागत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इसका वास्तविक असर बाजार और परिवहन किराए में कितना दिखाई देता है, यह देखने वाली बात होगी।



